{Best} Mirza Ghalib Shayari in Hindi || Shayari of Ghalib For Status 2021

mirza ghalib shayari in hindi

Here are the Best collection of Mirza Ghalib Shayari in Hindi, we have provide the best Mirza Ghalib Shayari in Hindi 2 lines along with Shayari of Ghalib image For DP.

Ghalib Shayari

ghalib shayari

जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा
कुरेदने हो जो अब रख राख जुस्तजू क्या है
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आईना देख के अपना सा मुँह लेके रह गए,
साहब को दिल न देने पे कितना गुरूर था।
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मेरे बारे में कोई राय मत बनाना गालिब
मेरा वक़्त भी बदलेगा तेरी राय भी !!
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आज फिर पहली मुलाक़ात से आग़ाज़ करूँ,
आज फिर दूर से ही देख के आऊँ उस को !!

ghalib shayari

कितना खोंफ होता है रात के अंधेरे में जाकर पूछ
उन परिंदों से जिनके घर नही होते
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इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ खुदा
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं !!
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चांदनी रात के खामोश सितारों की क़सम,
दिल में अब तेरे सिवा कोई भी आबाद नहीं।
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उनको देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक,
वो समझते हैं के बीमार का हाल अच्छा है

ghalib shayari

तेरे हुस्न को परदे की जरूरत नही ग़ालिब
कोन होश में रहता है तुझे देखने के बाद
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इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना।
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना।।
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इश्क़ पर जोर नहीं है ये वो आतिश ‘ग़ालिब’।
कि लगाये न लगे और बुझाये न बुझे।।
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हैं और भी दुनिया में सुखन-वर बहुत अच्छे,
कहते हैं कि ग़ालिब का है अंदाज़-ए-बयाँ और

Mirza Ghalib Shayari

ghalib shayari in hindi

हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन दिल
के खुश रखने को ग़ालिब ए खयाल अच्छा है
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रोने से और इश्क में बे-बाक हो गए,
धोये गए हम इतने कि बस पाक हो गए।
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तोड़ा कुछ इस अदा से तालुक़ उस ने
ग़ालिब के सारी उम्र अपना क़सूर ढूँढ़ते रहे
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बे-वजह नहीं रोता इश्क़ में कोई ग़ालिब
जिसे खुद से बढ़ कर चाहो वो रूलाता ज़रूर है !!

ghalib shayari in hindi

इश्क ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया
वरना हम भी आदमी काम के थे
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उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़।
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है !!
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हाथों की लकीरों पे मत जा ऐ गालिब।
नसीब उनके भी होते हैं जिनके हाथ नहीं होते।।
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बाजीचा ए अतफाल है दुनिया मिरे आगे
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मिरे आगे !!

ghalib shayari in hindi

दिल से तेरी निगाह जिगर तक उतर गई,
दोनों को एक अदा में रजामंद कर गई
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मौत का एक दिन मुअय्यन है।
नींद क्यूँ रात भर नहीं आती।
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रहा गर कोई तो क़यामत सलामत,
फिर इक रोज़ मरना है हज़रत सलामत।
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हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छे
कहते हैं कि ‘ग़ालिब’ का है अंदाज़-ए-बयाँ और

Mirza Ghalib Shayari in Hindi 2 lines

mirza ghalib shayari in hindi 2 lines

उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रोनक
वो समझते हैं की बीमार का हाल अच्छा है
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दर्द मिन्नत-कश-ए-दवा न हुआ
मैं न अच्छा हुआ बुरा न हुआ
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क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हाँ
रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन
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इश्क़ पर जोर नहीं है ये वो आतिश ‘ग़ालिब‘,
कि लगाये न लगे और बुझाये न बुझे ।।

mirza ghalib shayari in hindi 2 lines

मैं नादान था जो वफा को तलाश रहा ग़ालिब
यह न सोचा के इक दिन अपनी साँस भी बेवफा हो जाएगी
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मुहब्बत में उनकी अना का पास रखते हैं,
हम जानकर अक्सर उन्हें नाराज़ रखते हैं !!
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ग़ालिब बुरा न मान जो वाइज़ बुरा कहे,
ऐसा भी कोई है कि सब अच्छा कहें जिसे..!!
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कितना ख़ौफ होता है शाम के अंधेरों में,
पूछ उन परिंदों से जिनके घर नहीं होते..!!

mirza ghalib shayari in hindi 2 linesहाथों की लकीरों पे मत जा ए ग़ालिब नसीब
उन के भी होते है जिन के हाथ नही होते
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दर्द जब दिल में हो तो दवा कीजिए,
दिल ही जब दर्द हो तो क्या कीजिए..!!
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मोहब्बत में नही फर्क जीने और मरने का,
उसी को देखकर जीते है जिस काफ़िर पे दम निकले !!
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इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं

Shayari Ghalib

shayari ghalib

वो आए घर में हमारे खुदा की कुदरत है
कभी हम उनको कभी अपने घर को देखते है
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इन आबलों से पाँव के घबरा गया था मैं,
जी ख़ुश हुआ है राह को पुर-ख़ार देख कर !!
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ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता !!
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नज़र लगे न कहीं उसके दस्त-ओ-बाज़ू को।
ये लोग क्यूँ मेरे ज़ख़्मे जिगर को देखते हैं।।

shayari ghalib

हम जो सबका दिल रखते है
सुनो हम भी इक दिल रखते है
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इश्क़ पर जोर नहीं है ये वो आतिश ग़ालिब,
कि लगाए न लगे और बुझाए न बने।
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ज़िन्दग़ी में तो सभी प्यार किया करते हैं,
मैं तो मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा !!
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अपनी हस्ती ही से हो जो कुछ हो,
आगही गर नहीं ग़फ़लत ही सही !!

Shayari of Ghalib

shayari of ghalib

तुम न आए तो क्या सहर न हुई
हाँ मगर चैन से बसर न हुई।
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न था कुछ तो ख़ुदा था, कुछ न होता, तो ख़ुदा होता
डुबोया मुझको उन्‍होने, न होता मैं तो क्या होता
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तेरे हुस्न को पर्दे की ज़रुरत नहीं है ग़ालिब
कौन होश में रहता है तुझे देखने के बाद !!
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इश्क़ पर ज़ोर नही है ये वो आतिश ग़ालिब
की लगाए ना लगे और बुझाए ना बुझे !!

shayari of ghalib

मुझे कहती हे तेरे साथ रहूंगी सदा ग़ालिब
बोहत प्यार करती हे मुझसे उदासी मेरी
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हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी की हर ख्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले
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आईना क्यों न दूँ की तमाशा कहें जिसे
ऐसा कहाँ से लाऊं की तुझ सा कहें जिसे
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रोने से और इश्क़ में बे-बाक हो गए
धोए गए हम इतने कि बस पाक हो गए

mirza ghalib shayari

दिल-ए-नादान तुझे हुआ क्या है ?
आखिर इस दर्द की दवा क्या है ?
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आशिक़ हूँ प माशूक़-फ़रेबी है मिरा काम
मजनूँ को बुरा कहती है लैला मेरे आगे
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ज़िंदगी में तो सभी प्यार किया करते हैं,
मैं तो मरकर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा।
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करने गए थे उनसे तगाफुल का हम गिला,
‘की एक ही निगाह कि हम खाक हो गए।

Mirza Ghalib Shayari

mirza ghalib shayari

आगे आती थी हाल-ए-दिल पे
हँसी अब किसी बात पर नही आती
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कुछ तो तन्हाई की रातों में सहारा होता,
तुम न होते न सही जिक्र तुम्हारा होता !!
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एक आखरी मुलाकात को बुलाया था उसने मैंने
ना जाकर उस मुलाकात को बचा कर रख दिया
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मुसाफिर कल भी था मैं मुसाफिर आज भी हूं कल
अपनों की तलाश में था आज अपनी तलाश में हूं !!

mirza ghalib shayari

न सुनो गर बुरा कहे कोई, न सुनो गर बुरा कहे
कोई रोक लो गर गलत चले कोई बख्श दो गर खता करे कोई
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वो आए घर में हमारे, खुदा की क़ुदरत हैं,
कभी हम उमको, कभी अपने घर को देखते हैं।
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हम न बदलेंगे वक़्त की रफ़्तार के साथ,
जब भी मिलेंगे अंदाज पुराना होगा।
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खैरात में मिली ख़ुशी मुझे अच्छी नहीं लगती ग़ालिब,
मैं अपने दुखों में रहता हु नवावो की तरह।

mirza ghalib shayari hindi

बादशाह तो सिर्फ वक्त होता है
इंसान तो यूँ ही गुरुर करता है
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हम तो फना हो गए उसकी आंखे देखकर गालिब,
न जाने वो आइना कैसे देखते होंगे।
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वो आए घर में हमारे, खुदा की क़ुदरत हैं!
कभी हम उमको, कभी अपने घर को देखते हैं
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हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर इक ख्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मेरे अरमां, लेकिन फिर भी ही कम निकले

Mirza Ghalib Shayari in Hindi

mirza ghalib shayari hindi

मेरे बारे कोई राय मत बनाना ग़ालिब,
मेरा वक्त भी बदलेगा तेरी राय भी !!
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या खुदा, न वह समझे हैं, न समझेंगे मेरी बात
दे और दिल उनको, जो न दे मुझको जुबां !!
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न लुटता दिन को तो मैं रात को यूँ बे-ख़बर सोता
रहा खटका ना ही चोरी की दुआ देता हूँ रहज़न को !!
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मोहब्बत तो बस मुझे हुई थी
उसे तो बस तरस आया था मुझ पर !!

mirza ghalib shayari in hindi

मुस्कान बनाये रखो तो सब साथ है ग़ालिब वरना
आंसुओ को तो आँखों में भी पनाह नही मिलती
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इश्क़ ने ‘ग़ालिब’ निकम्मा कर दिया
वरना हम भी आदमी थे काम के !!
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आया है मुझे बेकशी इश्क़ पे रोना ग़ालिब
किस का घर जलाएगा सैलाब भला मेरे बाद !!

mirza ghalib shayari in hindi

हम जो सबका दिल रखते है
सुनो हम भी इक दिल रखते है
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दिल से तेरी निगाह, जिगर तक उतर गई,
दोनों को इक अदा में रजामंद कर गई…
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रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ाइल,
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है.
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वक़्त मोहताज कर गया ग़ालिब,
वरना माँ के आँचल तले नवाब थे हम !!